कोई इजहार करे, कोई इनकार करे
हम तो ऐतबार करके सिर्फ इंतजार करे ...
कोई देता है वासता, कोई रोके है रास्ता,
महफिले शमको है कोई पिंजड़े में फास्ता ..
हम उनकी राहों में गुलशने बहार करे…
जुदाई में उनके सायेसे खाबोमे में दीदार करे ...
न रंजिश इनकार की ... न है कोशिश इजहार की ...
दिल ये आबाद है ... सिर्फ खुशबु तेरे प्यार की ...
न घुटन की सांस है ... ना मिलन की आस है ...
इस दिल की दुहाई सिर्फ तेरा एहसास है ...
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