हमे मालूम है तुम हो एक नाजूकसा फूल..
हम न करेंगे तुम्हे तोडनेकी भूल
मगर ये न समजना की हम कायर है
क्यों की हम भी भवरो की दुनियांके वो शायर है..
जिनकी शायरी में हर रोज एक नया फूल होता है...
हमें मालूम है..
के तुम हो एक नशा..
दिल्बरोंके दिलकी आशा..
मगर ये न समाजों की हम भी कुछ कम है
क्योंकि हम में भी वोह दम है...
की जाम पे जाम लगाये जाय...
हमें मालूम है तुम एक आस हो
दीवानोके दिल की प्यास हो...
मगर ये ना समज़ना की तुम्हारे न मिलनेसे हम उदास है..
क्योंकि हम भी ऐसे प्यासे है...
जो बरसात की पहली बूँदसे ही अपनी प्यास बूज़ाते है...
हमें मालूम है की तुम आफरीन हो.
आशिकोंके दिलकी मज़बूरी हो..
मगर ए बेखबर तुम भी एक नारी हो
हमारे दिलकी सवारी होके भी ... हमारे बिना तो अधूरी हो..
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